

हल्दी का परिचय
हल्दी रस्म भारतीय विवाह की सबसे शुभ और महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है। इस रस्म में दूल्हा और दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है, जिसे शुभता, पवित्रता और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। हल्दी की रस्म आमतौर पर शादी के एक दिन पहले या उसी दिन सुबह होती है, जहां परिवार के सदस्य और दोस्त हल्दी लगाकर उत्सव का आनंद लेते हैं। यह रस्म न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हल्दी का महत्व
हल्दी को शुद्धिकरण और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह बुरी नजर से बचाती है और विवाह को सफल और शुभ बनाती है। वैज्ञानिक दृष्टि से हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा को निखारने, संक्रमण से बचाने और शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन की त्वचा को चमकदार बनाने में सहायक होते हैं। इस रस्म का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह विवाह के पहले दोनों पक्षों के बीच घनिष्ठता और खुशियों को बढ़ाता है।

आधुनिक समय में हल्दी रस्म
आधुनिक दौर में हल्दी रस्म पारंपरिक से अधिक उत्सवपूर्ण और ट्रेंडी हो गई है। हल्दी समारोह अब बड़े थीम-बेस्ड इवेंट के रूप में मनाया जाता है, जिसमें फूलों की सजावट, पीले कपड़े, संगीत, डांस और फोटोशूट का विशेष ध्यान रखा जाता है। कुछ लोग हल्दी के साथ उबटन और प्राकृतिक फेस पैक का भी उपयोग करने लगे हैं। पहले यह रस्म घर में सीमित रहती थी, लेकिन अब इसे बड़े समारोहों और डेस्टिनेशन वेडिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया गया है। हालांकि इसके मनाने के तरीके बदल गए हैं, फिर भी हल्दी रस्म का शुभता और सौभाग्य से जुड़ा महत्व आज भी बना हुआ है।
